षड्दर्शनमञ्जूषा

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प्रस्तुत ग्रन्थ ‘षड्दर्शनमञ्जूषा’ इसी समृद्ध दार्शनिक परम्परा के मूल ग्रन्थों के अध्ययन की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण प्रयास है। ग्रन्थ में तर्कसङ्ग्रह, तर्कभाषा, साङ्ख्यकारिका, योगसूत्र, अर्थसङ्ग्रह तथा वेदान्तसार जैसे महत्त्वपूर्ण ग्रन्थों को सम्मिलित किया गया है। इन ग्रन्थों के माध्यम से न्याय-वैशेषिक की तार्किक एवं पदार्थमीमांसात्मक दृष्टि, सांख्य का पुरुष-प्रकृति विवेक, योग की साधना एवं चित्तवृत्तिनिरोध की अवधारणा, पूर्वमीमांसा की कर्म एवं विधिविचार-प्रधान परम्परा तथा वेदान्त की ब्रह्मविद्या एवं मोक्ष-दृष्टि को समझने का अवसर प्राप्त होता है।

इस पुस्तक की एक प्रमुख विशेषता यह है कि इसमें विषय को मूल ग्रन्थों के आधार पर प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है। भारतीय दर्शन के अध्ययन में मूल ग्रन्थों का विशेष महत्त्व है, क्योंकि इनके माध्यम से विद्यार्थी केवल दार्शनिक सिद्धान्तों का सामान्य परिचय ही प्राप्त नहीं करता, बल्कि उस चिन्तन-परम्परा की मूल वैचारिक संरचना से भी परिचित होता है। इसी दृष्टि से ‘षड्दर्शनमञ्जूषा’ विद्यार्थियों, शोधार्थियों तथा भारतीय दर्शन के गम्भीर अध्येताओं के लिए उपयोगी संकलन के रूप में प्रस्तुत की जा रही है।